Kahaniya in hindi with moral | Hindi ki kahaniya | बच्चो की हिंदी कहानियाँ

kahaniya in hindi with moral

आपने अपने जीवन में एक बार Kahaniya in hindi with moral जरूर पढ़ी होगी। मैं यह कहानियाँ अपने बचपन में बहुत पड़ता था। इन कहानियो से मुझे बहुत कुछ सिखने को भी मिलता था। इसलिए आज में आपके लिए hindi ki kahaniya अपने सब्दो में लेकर आया हूँ। इन्हे पढ़े और अपने बच्चो को भी पढाय और उन्हें भी नैतिकता की बातें सिखाय। kahaniya with moral in hindi बच्चो के पढ़ने में सरल होती है और वे इन्हे आसानी से समझ भी पाते है।

1. कौवे और हिरण

kahaniya in hindi with moral
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एक दूर जंगल में एक कोवा और एक हिरण रहते थे, वे बहुत पुराने और अच्छे मित्र थे। एक दिन सुबह-सुबह हिरन उठ जाता है और कौवे को उसके घोंसले पर उठाने के लिए जाता।

हिरण कौवे से कहता, कौवे भाई उठ जाओ आज हम तालाब के पास वाले मैदान में अपना भोजन करने जायँगे।”

कोवा नींद में हिरण से बोलता है “भाई मुझे सोने दो मैं बाद में आ जाऊंगा तुम जाओ और हिरण उस मैदान के लिए अकेला निकल पड़ता है।”

उसी मैदान में एक लोमड़ी हिरण को देखती है और उसे अपना भोजन खाने की योजना बनती है। योजना के तहत लोमड़ी हिरण के पास जाती है। हिरण लोमड़ी को देख घबरा जाता है।

लोमड़ी हिरण से कहती है, क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे। मेरा इस जंगल में कोई दोस्त नहीं है हिरण भाई। मासूम हिरण चालक लोमड़ी के इरादों से अनजान लोमड़ी को कौवे के पास लेकर जाता है और कौवे से कहता है की यह लोमड़ी मेरी दोस्त बनना चाहती है। कोवा, और तुमने इस अजनबी से दोस्त कर ली?

फिर एक दिन लोमड़ी हिरन को लालच देकर मक्के के खेत मई ले जाती है। हिरण मक्के के खेत को देख कर भोत खुश होता है एक किसान के मक्के के पोधो को खा जाता है।

अगले दिन जब किसान खेतो में अत है तो वह देखता है की कोई जानवर उसकी फसलों को खा गया। वह हिरण को पकड़ने के लिए जाल बिछाता है। अगली सुबह हिरण और लोमड़ी फिर से फसल को खाने आते है और इस बार हिरण जाल में फस जाता है। यह देख हिरण वह से भाग जाता है और एक पेड़ के पीछे छुप जाता है। लेकिन कोवा आकर उसको बचने की योजना बतात है, जब किसान तुम्हे मरने के लिए जाल से निकलेगा तब तुम भाग जाना और हिरण ऐसा ही करता है।

कहानी का उद्देस्य : किसी भी अजनबी पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।

2. सोने की कुल्हाड़ी

kahaniya in hindi
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एक गांव में चंदन और वंदन नाम के दो व्यक्ति रहते थे। दोनों लकड़हारे थे और लकड़ियाँ काटते ओर उन्हें बाजार मई बेंच कर अपनी रोजी रोटी कमाते। लेकिन वंदन भोत अलसी और कामचोर था और वहीँ चन्दन बहुत मेहनती था।

वह रोज सूरज निकलने से पहले उठता और जंगल में लकड़ी काटने चला जाता। दूसरी और चन्दन, सूरज सिर पर आने के बाद उठता और देर से जंगल जाता और थोड़ी लकड़ियां काट कर घर वापस आ जाता। ऐसे करते-करते चन्दन अमीर हो गया और वंदन गरीब ही रह गया और चन्दन से जलने लगा।

धीरे-धीरे एक साल बाद चन्दन ने बहुत तरक्की कर ली। उसने अच्छा सा एक बड़ा घर बनवा लिया और शादी कर ली। शादी होने के बाद भी चन्दन रोज सुबह उठता और पुरे दिन लकड़ियां काटकर अपना घर चलता। दूसरी तरफ वंदन अभी तक वैसा का वैसा था।

एक दिन चन्दन रोज की तरह सुबह उठता और जंगल में चला गया उसने एक तालाब के किनारे पेड़ देखा और उसे वो पेड़ लकड़ी काटने के लिए बहुत सही लगा। वह पेड़ पर चढ़ गया और पेड़ की टहनी काटने लगा, तेहन कटने ही वाली थी की उसकी कुल्हाड़ी तालाब में गिर जाती है। वह बहुत परेशान हो जाता है क्युकी उस कुल्हाड़ी से उसका जीवन चलता था। परेशान होने के बाद वह तालाब के किनारे बैठकर प्रार्थना करने लगा, “हे.. जलदेव मेरी मदद करो।”

तभी तालाब में से जलदेव प्रकट होते है और चन्दन से पूछते है की वे उसकी क्या सहायता कर सकते हैं। चन्दन अपनी समस्या बताता है और जलदेव पानी में से एक सोने की कुल्हाड़ी लेकर आते है और चन्दन अपनी कुल्हाड़ी ना कबूल करता और जलदेव फिरसे पानी में जाते। अबकी बार जलदेव चांदी की कुल्हाड़ी लेकर आते और चन्दन फिर से मना कर दिया की वह उसकी कुल्हाड़ी नहीं है।

जलदेवता अबकी बार उसकी कुल्हाड़ी लेकर आते और इस बार चन्दन खुश हो जाता। हाँ-हाँ यही मेरी कुल्हाड़ी है और जल देव ने उसे वह कुल्हाड़ी देदी लेकिन उससे पूछा तुमने कहा की तुम्हारी कुल्हाड़ी बहुत कीमती है लेकिन तुमने सोने और चंडी की कुल्हाड़ी लेने से क्यों इंकार कर दिया?

“यह कुल्हाड़ी कीमती ही तो है यदि ये ना हो तो में लकड़ी कैसे काटता, यही तो मेरे जीवन का एक मात्र सहारा है।”

जल देव उसकी इन बातो से बहुत खुश हुए और उसे वह सोने और चांदी की भी कुल्हाड़ी दे दी और कहा।

“तुम एक ईमानदार और महेनति व्यक्ति हो”

घर लौटते वक्त वंदन उन सोने और चांदी की कुल्हाड़ी देख चन्दन का घर तक पीछा करता। जब चन्दन पूरी घटना अपनी पत्नी को बता रहा होता तो वह खिड़की से उनकी साडी बात सुन लेता। वह भी उस तालाब के पास जाता और अपनी कुल्हाड़ी उसी तालाब में फेंक प्रर्थना करने लगता।

जलदेव प्रकट होते है और वंदन से पूछते है की वे उसकी क्या सहायता कर सकते हैं। वंदन अपनी समस्या बताता है और जलदेव पानी में से एक उसकी असली कुल्हाड़ी लेकर आते है और चन्दन अपनी कुल्हाड़ी ना कबूल कर देता। जलदेव फिरसे पानी में जाते और चांदी की कुल्हाड़ी लेकर आते और वंदन फिर से मना कर देता अबकी बार जल देवता सोने की कुल्हाड़ी लेकर आते और इस बार वंदन हाँ करता।

“तुम बहुत बेईमान और लालची व्यक्ति हो” यह कह कर जलदेवता पानी में समां जाते है और वंदन की एक मंत्र कुल्हाड़ी भी चली जाती है।

कहानी का उद्देस्य : हमेशा एक ईमानदार व्यक्ति बने क्योकि लालच बुरी बला है।

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3. सोने का अंडा

kahaniya for hindi
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एक गांव में एक व्यक्ति पोल्ट्री फार्म चलता था और उसी से अपना और अपनी पत्नी का जीवन व्यापन करता था। वह उस फार्म मई एक मुर्गी से बहुत प्रेम करता था और उसका खास ख्याल रखता था।

एक दिन वे एक सुबह फार्म में उसी मुर्गी के पास जाता और वह यह देख कर बहुत चौंक जाता की उस मुर्गी ने सोने का एक अण्डा दिया हुआ है।

वह बहुत खुश होता और उस अण्डे को बेच कर पैसा कमाता। ऐसे ही रोज मुर्गी एक सोने का अण्डा देता और वो उसे बेंच कर खूब पैसे कमाता। कुछ समय बाद वो काफी धनवान व्यक्ति बन जाता है। लेकिन फिर भी जल्दी से जल्दी गांव का सबसे अमीर आदमी बनने का सपना देखने लगता।

लालच में आकर अगली सुबह वह फार्म में जाता और उस एक बार में ही सोने के ढेर सारे अण्डे प्राप्त करने की लालच में मुर्गी के पेट का काट देता। वह यह देख कर हैरान हो जाता ही की मुर्गी के पेट में एक भी अण्डा नहीं है। उसे अपने इस किय पर बहुत पछतावा होता है।

कहानी का उद्येश्य : लालच करना बुरी बला है इससे आप वो भी खो देते हो जो आपके पास पहले से ही होता है।

4. दो चिड़िया और एक बंदर

hindi ki kahaniya
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एक जंगल में एक पेड़ था उस पेड़ पर एक घोंसला था जिसमे दो चिड़ियाँ रहती थी। एक दिन बहुत जोरो से हवा चलने लगी और फिर जोर से बारिश होने लगी।

मौसम बहुत ठंडा हो गया और सरे जानवर ठंड से ठिठुरने लगे। लेकिन वह दोनो चिड़िया सुरक्षित थी, तभी दूर से एक बंदर ठण्ड मई ठिठुरते हुए पेड़ के नीचे आकर खड़ा हो गया और भीगने के कारन वह अब भी काँप रहा था।

उस बंदर को ठिठुरता देख दोनों चिड़िया आपस में बात करने लगी की क्या हम इसको सलाह देकर इसकी कुछ मदद कर सकते है। दूसरी चिड़िया, “मदद? हम क्या मदद कर सकते है इस बंदर की? वह बहुत गुस्सैल है अगर उसे हमारी सलाह पसंद नहीं आई तो वह हमे नुकसान पहुंचा सकता है।

पहली चिड़िया बंदर से, “सुनो…. सुनो दोस्त, ऊपर देखो।” ओह चिड़िया में पहले से ही भीगा हुआ हु, इसलिए मुझे तंग मत करो।

में परेशान नहीं कर रही, मुझे तो बस तुम्हे कुछ बताना है। बंदर बोला कहो क्या बताना है तुम्हे?

हम तो चिड़िया है ओर फिर भी अपनी चोंच से घोंसला बना क्र इसमें सुरक्षित है। और तुम तो इंसान की तरह हो। तुम्हारे दो हाथ, दो पैर है और फिर भी तुम इधर-उधर भटक रहे हो। ऐसा सुनते ही बन्दर को लगा वे उसका मजाक बना रहे है और बन्दर गुस्से में आकर पेड़ पर चढ़ गया।

पेड़ पर चढ़ने बाद बंदर ने उन चिडियो का घोंसला तोड़ दिया और वे चिड़िया बेघर हो गयी।

कहानी का उद्देस्य : किसी सलाह देने से पहले एक बार जरूर सोच लें की कही इसमें आपका ही तो नुकसान नहीं।

5. दो कौवे और एक सांप

kahaniya with moral in hindi
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एक पेड़ पर दो कौवे पति पत्नी रहते थे। वे काफी दुखी रहते थे क्योकि उनके घोंसले के पास एक सांप का बिल था। वे जब भी अंडे देते और खाना इखट्टा करने के लिए घोंसले से दूर जाते तो वह सांप आकर उनके अंडो को खा जाता।

ऐसा उस सांप ने एक, दो, या तीन बार नहीं कई बार किया। इन सब से परेशान कौवे एक चालक लोमड़ी के पास जाते और उसे अपनी आपबीति सुनते।

पूरी घटना सुनने के बाद लोमड़ी कोवो को एक योजना बताती है। कौवे अपने घर वापस चले जाते है।

अगले दिन पास की नदी में राजकुमारी नहाने अति है और अपनी कीमती मोतियों की माला नदी के किनारे एक पत्थर पर रख देती है। माला रखते ही वे कौवे माला उठा कर उस सांप के घोंसले के की तरफ उड़ने लगते है।

कोवो को माला लेजाते देख राजकुमारी अपने सैनिको को आदेश देती है। “जब तक वे वह मोतियों की कीमती माला प्राप्त ना कर ले तब तक मेहल में न लौटे।” सैनिक दौड़ते हुए कौवे का पीछा करने लगे।

अंत में कौवे सांप के बिल तक पहुँच गए और कीमती हार सांप के बिल में डाल दिया। ऐसा करते हुए सैनिको ने देख लिया और बिल के पास पहुँच कर एक सिपाही ने अपने भले से बिल को खोदने लगा।

तभी उसमे से सांप बाहर आया और दूसरा सैनिक घबरा गया और अपनी तलवार से सांप की गर्दन काट दी। अंत में वह मोतियों की कीमती माला लेकर राजकुमारी के पास ले गए।

अब सांप के मरने बाद कौवे खुशी-खुशी जीवन बिताने लगे और उनके इस बार दो बचे भी हुए।

कहानी का उद्येश्य : यदि दुश्मन ताकतवर है तो उसे अपनी बुद्धि से हराय।

Final words : एक बार फिर आपका स्वागत करता हु इस स्टोरी की सीरीज में। यह Kahaniya in hindi with moral पर आधारित पाँच बेहतरीन कहानियाँ है जिन्हे में अपने बचपन में पढ़ा करता था। ऐसी और संबंधित कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Panchtantra ki kahaniya in hindi, best Hindi story for kids, Akbar birbal story in hindi

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