Panchtantra ki kahaniya in hindi | panchtantra story | पंचतंत्र की कहानियां हिंदी में

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Panchtantra ki kahaniya in hindi

क्या अपने कभी अपने बचपन में Panchtantra ki kahaniya in hindi पढ़ी है? यदि हाँ, तो आप जानते होंगे की उन्हें पढ़ने में कितना आनंद आता है। उन यादो को एक बार फिरसे तजा करे इन प्यारी छोटी-छोटी panchtantra ki kahaniyan को पढ़ कर। यह कहानियाँ आपको आपके बचपन की याद दिलाएँगी और आप इनको अपने छोटे बच्चो, भाई, बहन को पढ़ा सकते हैं। आज हम आपके लिय पांच ऐसी बेहतरीन स्टोरी लेकर आय है। इन्हे एक बर जरूर पढ़े।

1. बहादुर चींटी और खतरनाक सांप

Panchtantra ki kahaniya in hindi
Panchtantra ki kahaniya in hindi

एक समय की बात है एक पेड़ पर बिल में एक सांप रहता था वो मेंढक और पंछियों को खाता था। वेह दिन में सोता और रात में शिकार करता था। कुछ दिन बाद वो सांप बड़ा हो गया और उस बिल में ना घुस पाया तो उसने सोचा कि अब वो अपना ठिकाना बदलेगा।

अपने नए घर की तलाश करता हुआ उसे एक बरगद का पेड़ दिखा उस पेड़ के नीचे चीटियों की पहाड़ी थी। सांप पेड़ के पास आया और बोला “अबसे इस पेड़ पर मैं रहूंगा तुम सबको इस जगह से तुरंत जाना पड़ेगा।”

उस पेड़ के आसपास रहने वाले सभी जानवर और पंछी बहुत डर गए थे मगर चीटियों को कुछ फर्क नहीं पड़ा था।

“वो पहाड़ी उन्होंने बहुत मेहनत से बनाई थी।”

सभी चीटियां एकजुट होकर आगे बढ़ी और उस सांप को चारों तरफ से घेर लिया और उसे काटने लगी। उसे बहुत दर्द हुआ और चिल्लाता हुआ वहां से भाग गया उसके बाद वह वहां कभी वापस नहीं आया तभी से सारे जानवर और पंछी वहां खुशी से रहने लगे।

कहानी का उद्देश्य : यदि कोई कार्य निडर होकर और उसे मिलकर किया जाय तो वह नामुमकिन को भी मुमकिन बना देता है।

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2. सोने का ढेर!

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एक बार था एक किसान वीर नाम का वेह दूसरों के खेतों पर हल चलाने का काम करके अपनी रोजी रोटी कमाता था। एक बार वह एक खेत पर गया उसने काम शुरू ही किया था की उसको जमीन में कुछ पीला और चमकीला नजर आया। मिट्टी हटाकर देखा तो अंदर था सोने का ढेर, वीर इतना बड़ा ढेर देखकर चकित रह गया और अपने आपको भाग्यशाली समझा।

अपने साथ सोने के ढेर को ले जाना चाहता था परंतु दिन का समय था, और ऐसे खुलेआम दिन में इतनी कीमती चीज ले जाना उसको सही नहीं लगा वीर ने रात को उधर वापस आने का निर्णय लिया और सोने को वहीं पर छुपा दिया।

वीर वापस उस रात लौट कर आया और जमीन को खोदने लगा और सोने के ढेर को। रस्सी से बांध दिया ताकि उस को आसानी से खींच पाए परंतु सोने का ढेर बहुत भारी था। वीर ने फिर उस सोने के ढेर को चार समान हिस्सों में काटने का निर्णय लिया ताकी ढेर को आसानी से और सुरक्षित उसके घर ले जा पाए।

वीर ने ढेर को चार हिस्सों में काट दिया और अंत में वह सारा सोना आराम से ले गया। सोने से वीर अब धनवान बन गया और कई संपत्ति भी प्राप्त कर ली।

कहानी का उद्देश्य : अगर किसी समस्या का समाधान शांति पूर्वक निकले तो उसके कई हल निकले जा सकते है।

3. एक चींटी और कबूतर!

panchtantra ki kahani
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एक समय की बात है पेड़ पर से एक चींटी तालाब में गिर गई एक कबूतर ने उसे अपना जीवन बचाने के लिए जीतोड़ कोशिश करते हुए देखा उसने एक पत्ते को तोड़ा और चींटी के पास फेंक दिया चींटी झट से पत्ते पर चल गई और बड़ी कृतज्ञता भरी नजरों से उसने कबूतर का धन्यवाद किया और वह बहुत थक भी गई थी

कुछ सप्ताह बाद की बात है एक बहेलिया जंगल में आया, बहेलिया का तो काम ही होता है पक्षियों को पकड़ना

उसने कुछ दाने जमीन पर फेंके और उस पर अपना जाल बिछा दिया और चुपचाप किसी पक्षी के जाल में फंसने का इंतजार कर रहा था

वही चींटी जो वहीं कहीं से गुजर रही थी उसने जब वह सारी तैयारी देखी तो क्या देखती है कि वही कबूतर जिसने उसकी जान बचाई थी उड़कर उसी जाल में फंसने के लिए धीरे-धीरे नीचे उतर रहा था

चींटी ने एकदम आगे बढ़ बहेलिया के पैर पर इतनी बुरी तरह काट दिया कि बहेलिया के मुंह से चीख निकल गई

“ओह.. तेरी ऐसी की तैसी, हाय… हेय परमात्मा!”

कबूतर ने एकदम देखा कि शोर किधर से आ रहा है और बहेलिया को देखते ही उसके सब कुछ समझ में आ गया और वह दूसरी दिशा में उड़ गया और उसकी जान बच गई फिर चींटी भी अपने काम पर निकल पड़ी

कहानी का उदेश्य : कर भला तो हो भला! (यदि आप किसी की मदद करेंगी तभी तो बदले में कोई आपकी मदद करेगा)

4. हाथी की सच्ची मित्रता!

panchtantra ki kahaniyan
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बहुत पुरानी बात है एक जंगल में एक हाथी किसी मित्र की तलाश में इधर-उधर घूम रहा था।

उसे पेड़ पर एक बंदर दिखाई दिया और पूछा “बंदर भाई क्या तुम मेरे मित्र बनोगे”

बंदर बोला “आप तो बहुत बड़े हो और मेरी तरह एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर झूल भी नहीं सकते तो फिर आपकी मेरी दोस्ती किसी?”

अगले दिन उसकी मुलाकात एक खरगोश से हुई “क्यों खरगोश जी क्या तुम मेरे मित्र बनना पसंद करोगे?”

“आप तो बहुत बड़े हैं आप मेरे बाड़े में घुस भी नहीं सकेंगे तो मेरी आपकी दोस्ती मुमकिन नहीं” खरगोश हाथी से कहता हैं।

हाथी अब मेंढक के पास पहुंचा “मेरा कोई मित्र नहीं है मेंढक मित्र अगर तुम मुझे अपना दोस्त बना लो तो तुम्हारी बड़ी कृपा होगी।”

“मान ना मान मैं तेरा मेहमान, तुम इतने बड़े और मैं इतना छोटा। कुछ तो सोचो, यह बेमेल की दोस्ती नहीं हो सकती और तुम मेरी तरह फुदक भी तो नहीं सकते। जाओ भाई कहीं और अपनी दाल गलाओ।

अचानक हाथी को एक लोमड़ी दिखाई दी उसने उसे रोका और पूछा “लोमड़ी सुनो क्या तुम मुझे अपना मित्र बनाना पसंद करोगी? देखो ना मत कहना में बड़ी उम्मीद से तुम्हारे पास आया हूं, बोलो बनोगी ना तुम मेरी मित्र।”

लोमड़ी हठी से, “ना बाबा ना, अपना साइज तो देखो, गलती से मैं तुम्हारे पांव के नीचे आ गई तो मेरी चटनी बन जाएगी, ना बाबा ना कोई और घर देखो।

हाथी मायूसी से कहता, कमाल है कोई मुझे अपना मित्र नहीं बनाना चाहता।

अगले दिन हाथी ने देखा किस जंगल के सभी जानवर बहुत तेजी से भाग रहे थे. हाथी लोमड़ी से पूछा “क्या हुआ तुम सब ऐसे क्यों भाग रहे हो?”

“हाथी दादा पीछे शेर है और जो हम सब को मारकर खा जाना चाहता है” सभी जानवर अपनी-अपनी जान बचाकर कहीं छुप जाना चाहते हैं।

शेर तो जानवरों के पीछे हाथ धोकर पड़ा था हाथी ने शेर से कहा “जजमान क्यों व्यर्थ में सबकी जान के पीछे पड़े हो, सारे जानवरों को क्या एक ही दिन में मार दोगे?

“जा-जा अपना रास्ता देख तुझे क्या, जो मेरा दिल करेगा मै वो करूँगा” शेर ने दहाड़ते हुए कहा।

हाथी को समझ आ गया कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते, “उसने शेर को जोर से एक लात मारी और शेर के होश ठिकाने आ गए और वह डर कर भाग गया” हाथी ने जब हाथी खुशखबरी सुनाई तो सबकी खुशी का ठिकाना ना रहा सभी ने हाथी को धन्यवाद दिया और कहा “हमारा मित्र बनने के लिए सचमुच तुम्हारा साइज बिलकुल ठीक है।”

कहानी का उदेश्य: मित्र वह जो मुसीबत में काम आए।

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5. जिसकी लाठी उसकी भैंस!

panchtantra story
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एक गांव था, जिसमें नाथू नाम एक ग्वाला रहता था। वे अपनी भेंसो से अधिक प्रेम करत था। वह भेंसो का दूध बेच कर अपनी रोज़ी रोटी काया करता था।

पूरा गांव उसके व्यवहार से बेहद खुश रहते थे, क्योकि वह बहुत सरल और निर्मल व्यक्ति था और अन्य दूध वालो की तरह दूध में पानी नहीं मिलाया करता था। कुछ समय बाद, उसके इस सरल व्यहवार के कारण उसके ग्राहक बढ़ गए।

एक दिन सारा दूध बेच कर नाथू अपने घर लौट रहा था। रस्ते मई उसे गांव का एक बचा मिलता और उसने कहा “नाथू काका-नाथू काका, क्या दूध मिलेगा?

नाथू ने बच्चे से कहा, “दूध तो ख़तम हो गया है” और सोचने लगा की अब वह क्या करे? क्योकि, रोजाना ग्राहक बढ़ने के कारण अब उसके पास दूध की कमी पड़ने लगी।

तभी, उसके मन में विचार आया की वह एक नई भैंस खरीद लेगा जो उसके दूध की पूर्ति कर देगी। वह अगली सुबह बाजार जाता और एक काली रंग की भैंस को खरीद लेता है।

बाजार से गांव जाने वाले रस्ते के बिच एक जंगल पड़ता है। भेंसो को घर ले जाते समय जंगल के बीचो-बिच एक चोर नाथू को रोकता है जिसके हाथो मई एक लाठी थी। नाथू घबरा जाता है और कहता, “बोलो भाई क्या चाहिए आपको?”

“यह भैंस मुझे दे दो वरना इसी लाठी से तरबूजे की भांति तुम्हारा सर भोड़ दूंगा” चोर गुस्से से बोला। घबराया नाथू एक योजना सोचता है और फिर चुप-चाप चोर को वह भैंस दे देता है।

“चोर भाई अगर में खली हाथ घर गया तो मेरी लुगाई मुझे बहुत मारेगी” अब नाथू चोर को कहता है। इसलिए आप मुझे यह लाठी दे दो जिससे आप भी खुश और मे भी खुश। चोर हस्ता है और उसको डरपोक बोलते हुए वह लाठी नाथू को दे देता है।

जैसे ही लाठी नाथू के हाथ में अति है वह चोर को कहता, “यह भैंस मुझे दे दो वरना मई इसी लाठी से तुम्हारा सर फोड़ दूंगा। चोर घबरा कर नाथू को वह भैंस लौटा देता है और इस तरह नाथू ने अपनी भैंस को बचाया।

कहानी का उद्देश्य : जिसकी लाठी उसकी भैंस।

Final word : हमें आशा है की आपको हमारी इस Panchtantra ki kahaniya in hindi की सीरीज पसंद आई होगी। ऐसी और भी कहानियो के लिए निचे दिय गए लिंक पर क्लिक करे और हमे फॉलो और पोस्ट को शेयर करना न भूले, धन्यवाद।

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